48. जानकीशरणम् सत्र 26 सितंबर 2026
Jankisharnam satra september 2026
जानकीशरणम् 26 सितम्बर 2026 सत्र
जय जय राम कृष्ण हरी
जय जय राम कृष्ण हरी
सीताराम हनुमान सीताराम हनुमान
सीताराम हनुमान सीताराम हनुमान
जय जय सियाराम जय जय सियाराम
जय जय सियाराम जय जय सियाराम
सियापति सियापति रामा रामा सियापाती
सियापति सियापति रामा रामा सियापति
सियापति सियापति राम राघव सियापति
राम राघव राम राघव राम राघव सियापती
रामा रामा रामा रामा रामा रामा सियापति
सियापति सियापति अवध बिहारी सियापति
सियापति सियापति सारंग धारी सियापति
सियापति सियापति जनक जमाई सियापति,
सियापति सियापति कौशल्या जाई सियापति
सियापति सियापति संकट हारी सियापति
सियापति सियापति मंगल कारी सियापति।
सियापति सियापति छवि अति न्यारी सियापति,
सियापति सियापति अहिल्या तारी सियापति,
सियापति सियापति पतित उधारी सियापति
सियापति सियापति मुनि मन हारी सियापति
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
राम बोल राम बोल राम बोल राम बोल
राम बोल राम बोल राम बोल राम बोल
सीताराम सीताराम सीताराम राम बोल
सीताराम सीताराम सीताराम राम बोल
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
सिया सिया सिया सिया सिया सिया बोल
श्री राम राघव रस के से बोल
सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
हरे रामा सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
हमसे अधम अधीन अगर तारे ना जाएंगे
हमसे अधम अधीन अगर तारे ना जाएंगे
तो आप दीन बंधु पुकारे ना जाएंगे
पृथ्वी का.भार आपने सो बार उतारा
क्या मेरे पाप भार उतारे ना जाएंगे
जो बिक चुके हैँ और ख़रीदा है आपने
वो अब गुलाम गैर के ना द्वारे जाएंगे
हमसे अधम अधीन अगर तारे ना जाएंगे
तो आप दीन बंधु पुकारे ना जाएंगे
तब तक ना चरण आपके संतोष पाएंगे
दृग बिंदु से जब तक ये पखारे ना जाएंगे
हमसे अधम अधीन अगर तारे ना जाएंगे
तो आप दीन बंधु पुकारे ना जाएंगे
तजौ मन, हरि-बिमुखनि कौ संग।
जिनकै संग कुमति उपजति है,
परत भजन में भंग॥
हरे रामा जनक सुता सुखकारी
हरे रामा जनक सुता सुखकारी राघव की प्यारी सिय प्यारी
अंतरा -1
मुख शरद छंद सों लागे
देखत ही काम सब भागे रामा
के हरे रामा चरण कमल पर वाऱी
राघव की प्यारी सिय प्यारी
अंतरा -2
करुना की मूरति मैया,
शरनागत की रखवैया रामा।
के हरे रामा मेटत संकट भारी,
राघव की प्यारी सिय प्यारी॥
अंतरा -3
करुणामयी मात हमारी,
अधमन को तारनहारी रामा।
के हरे रामा प्रभु सन नेह जुड़ारी,
राघव की प्यारी सिय प्यारी॥
अंतरा -4
जो भटके मोह के बन में,
तुम भक्ति जगातीं जन में रामा।
के हरे रामा माँ तुम पर बलिहारी
राघव की प्यारी सिय प्यारी॥
सिय सुकुँआरी करुणा धारी, तारो कोटि मुनिन संता
करुणा बरसावन जन सुख पावन पूजत जाहि श्री मंता
राम मिलवावहिं भक्ति दृढ़वावहिं जा को पायो नहीं अंता
भूमि तें प्रगटीं अवध विलासिनी जय सीता हे कृपावंता
मिथिलेश कुमारी जनक दुलारी, गावत वेद मुनिन संता
कनक बरन तन अति सुकुमारी, सोहत राम श्री मंता
राम प्रेम रस रँग में राती, जाके सुख को नहिं अंता
युगल चरन रति देहु किशोरी, जय सिय मातु गुणवंता
नयन बिसाल बिलोकनि पावन, हरत क्लेस मुनिन संता
अंचल छाँह रखहु सरनागत, तुम सम और न श्री मंता
करुणा करि रघुनाथ मिलावहु, भव बाधा को करि अंता
सदा बसहु सिय मानसि मोरे, जय सिय मातु धीमंता
जे यहि कथा सनेह समेता। कहहिं सुनहिं समुझहिं सचेता॥ होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलिमल रहित सुमंगल भागी॥"
राम कथा के तेइ अधिकारी।
जिन्ह कें सत संगति अति प्यारी।
राघव जी से प्रार्थना करिये
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
याही जगत तुम ही सांचे
जग या मैंने बिसारो
बिसारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
हे करूणानिधि करुणा करिये
मेरी ओर निहारो
निहारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
भव सागर में नाव फंसी है
तुम ही खेवनहारो
हारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
अधम उदारण करुणासिंधु
जीवन डोर संभारो
संभारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
जानकीशरण चरण शरण है
जीवन तुम पर वारो।
वारो
भव सागर से तारो राघव,
भव सागर से तारो
बढ़ भागी अंगद हनुमाना
चापत चरण कमल विधि नाना
कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि।
बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि॥
हनुमान सम नहीं बढ़भागी
नहीं कोउ राम चरण अनुरागी
पुण्य पुंज तुम पवन कुमारा
सेवाहूँ जाई कृपा आगारा
नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च। मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद॥
रामजी कथा में कैसे मिलेंगे
मन क्रम बचन छाड़ी चतुराई
भजत कृपा करिहहीं रघुराई
नित्य रामजी से कहो
नाथ सकल सम्पदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सुत नारी
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
काहे की वा नाव बनाई, काहे की पतवार?
रामा, काहे की लगा दई जंजीर? सागर में नैया डार दई॥
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
अरे राम-नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार।
रामा, ज्ञान की लगा दई जंजीर, सागर में नैया डार दई॥
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
अरे कौन सखी वामें बैठनहारी, कौन पार लगावै?
रामा, कौन है खेवनहार? सागर में नैया डार दई॥
मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
सीता सखी वामें बैठनहारी, राम पार लगावै।
रामा, हनुमत खेवनहार, सागर में नैया डार दई॥
हो मनैं तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई॥
ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।
ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु॥
अरे अंजनी पुत्र केसरी नंदन, तुम जग जग के काटत बंधन,
तुमरे हृदय बसे रघुनंदन।
हाँ, अंजनी पुत्र केसरी नंदन, तुम जग जग के काटत बंधन,
तुमरे हृदय बसे रघुनंदन।
कि तुमरे हृदय में... हाँ तुमरे हृदय में,
बैठे सीताराम, हमारे संकट काटो प्रभु॥
हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु॥
अरे तुमको जानत है जग सारो, संकट मोचन नाम तुम्हारो,
आके संकट हरो हमारो।
हाँ तुमको जानत है जग सारो, संकट मोचन नाम तुम्हारो,
आके संकट हरो हमारो।
कि तुमको संकट मोचन... हाँ तुमको संकट मोचन,
मानत है भगवान, हमारे संकट काटो प्रभु॥
हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु॥
अरे बड़े-बड़े दानव सब मारे, रामचंद्र के काज सवारे,
आके संकट हरो हमारे।
हाँ बड़े-बड़े दानव सब मारे, रामचंद्र के काज सवारे,
आके संकट हरो हमारे।
ए लक्षण जी के... अरे हाँ लक्षण जी के,
बचाय तुमने प्राण, हमारे संकट काटो प्रभु॥
मिथिला महि पावन करण सहज़ सुहावन दोए
चरण कमल सीय मातु के सुमिरत मंगल होए
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
जय राम प्राणधन सिया सिया
जय मनोहरिणी सिया सिया
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
जय राम प्राणधन सिया सिया
जय मनोहरिणी सिया सिया
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
जय अवध बिहारिणी सिया सिया
जय संकट हारिणी सिया सिया
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
जय अवध बिहारिणी सिया सिया
जय संकट हारिणी सिया सिया
जय जनक दुलारी अति सुकूमारी राम प्राणधन सिया सिया
सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
सिया बोल सिया बोल सिया बोल सिया बोल
जय सीताराम जय सीताराम
जय सीताराम जय सीताराम
जय जय सिया राम जय जय सियाराम
जय जय सियाराम जय जय सियाराम
जय सीताराम जय सीताराम
कनक भवन मैं सीताराम
जनकपुरी मैं सीताराम
सरयू तट पे सीताराम
अवधपुरी मैं सीताराम
चित्रकूट में सीताराम
जय सीताराम जय सीताराम
जय जय सियाराम जय जय सियाराम
जय जय सिया राम जय जय सियाराम
जय सीताराम जय सीताराम
जीवन की बली जईहों जानकी
श्रवनन और कथा नहीं सुनिहों
रसना और ना गइहों
जीवन की बली जईहों जानकी
रोकिहों नयन बिलोकत औरहीं
सीश ईश ही नइहों
जानकी जीवन की बली जइहों
बली जाइहों जानकी
जानकी जीवन की बली जईहों
जगत जपत रघुनाथ नाम सब
जगत जपत रघुनाथ नाम सब,
जगत जपत रघुनाथ नाम सब॥
राम जपत सीता को सुमिरन,
राम जपत सीता को सुमिरन॥
(अंतरा - १)
रामचंद्र को ध्यान धरत मुनि,
रामचंद्र को ध्यान धरत मुनि।
बसत जानकी रामचंद्र मन,
बसत जानकी रामचंद्र मन॥
(जगत जपत रघुनाथ नाम सब...)
(अंतरा - २)
शिव विरंच के धनुष धरण धन,
शिव विरंच के धनुष धरण धन।
रघुवर के मैथिली महा धन,
रघुवर के मैथिली महा धन॥
(अंतरा - ३)
परम हंस कुल राम भजन भर,
परम हंस कुल राम भजन भर।
अग्र स्वामी एक पत्नी को बन,
अग्र स्वामी एक पत्नी को बन॥
(जगत जपत रघुनाथ नाम सब...)
कबीर मन निर्मल भया, जैसी गंगा नीर।"
"पाछें-पाछें हरि फिरें, कहत कबीर कबीर।।"
लज्जा जाए रही है मोरी
कह नरसी कर जोड़ी
लज्जा जाए रही है मोरी
पहले तो तुम आते जाते
अब क्यों मममता तोड़ी रे
आना है तो आजा साँवरे
इधर भी परवा छोड़ी
लज्जा जाए रही है मोरी
मेरे गृह चेतन को नहीं
तेरी जीभ चटोरी
चोरी चोरी तेने माखन खायो
करि करि बतियान भोरी
लज्जा जाए रही है मोरी
शबरी के बेर सुदामा के कंडुल
खा गयो भरि भरि झोरी
कह नरसी तुम सुनो निरंजन
बरसो छप्पर फोड़ी
लज्जा जाए रही है मोरी
या तो प्रेम मार्ग में आइये मत और अगर आएं तो लव नहीं प्रेम करिये
काशी के प्रकांड विद्वान मधुसूदन पाद कहते हैँ हे मन वृब्दावन की गलियों से प्रेम मत करना अगर वो त्रिभुग लली दिख जाए तो उसे नयन भर देखना मत अगर देख लिया तो वो कुछ कहे सुनना मत क्यूंकि अगर सुन लिया तो फिर मन वृन्दावन से वापिस न आपाओगे
प्रेम नगर मत जा मुसाफिर
कोरस:
प्रेम नगर मत जा मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
आ... प्रेम नगर मत जा मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
अंतरा 1:
प्रेम नगर की सकरी है गलियां, प्रेम नगर की सकरी है गलियां
ओ... प्रेम नगर की सकरी है गलियां, प्रेम नगर की सकरी गलियां
ता में दो ना समाए मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
ता में दो ना समाए मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
अंतरा 2:
प्रेम नगर की गहरी है नदियां, प्रेम नगर की गहरी है नदियां
ओ... प्रेम नगर की गहरी है नदियां, प्रेम नगर की गहरी है नदियां
लाखों लोग डूबे मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
लाखों लोग डूबे मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
अंतरा 3:
प्रेम नगर का पंथ कठिन है, प्रेम नगर का पंथ कठिन है
हो... प्रेम नगर का पंथ कठिन है, प्रेम नगर का पंथ कठिन है ता में ना चल पाए मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
अंतरा 4:
प्रेम नगर की सुंदर हैं परिया, प्रेम नगर की सुंदर परिया
ओ... प्रेम नगर की सुंदर हैं परिया, प्रेम नगर की सुंदर परिया
लाखों लोग लुभाए मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
लाखों लोग लुभाए मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
समापन:
प्रेम नगर मत जा मुसाफिर, प्रेम नगर मत जा
प्रेम नगर मत जा
दर्शन दो घनश्याम नाथ, मोरी अखियां प्यासी रे...
मन अटका तुम्हारे चरणों में, जैसे गंगा का नीर निर्मल भया..."
सांवरियो है सेठ
(स्थाई)
सांवरियो है सेठ, सांवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठानी है!
सांवरियो है सेठ, saंवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठानी है!
ये तो सारी दुनिया जानी है,
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठानी है!
(अंतरा - १)
राजाओं के राजा, महारानी सी रानी,
सिर मोर मुकुट साजे हैं!
राजाओं के राजा, महारानी सी रानी,
सिर मोर मुकुट राजे हैं!
दरबार निराला लागे, जोड़ी प्यारी,
राधा के संग साजे हैं!
दरबार निराला लागे, जोड़ी प्यारी,
राधा के संग साजे हैं!
सोने पल में सेठ, सोने पल में सेठ,
सोने पल-पल में सेठानी है!
सोने पल में सेठ, सोने पल में सेठ,
सोने पल-पल में सेठानी है!
ये तो सारी दुनिया जाने,
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठानी है!
(अंतरा - २)
सुख-दुख में सांवरिया, सुख-दुख में राधा जी,
सदा मेरे साथ हैं!
सुख-दुख में सांवरिया, सुख-दुख में राधा जी,
सदा मेरे साथ हैं!
मेरी चिंता दूर करे, मेरी विपदा दूर करे,
रख लेवे बात है!
ओ मेरी चिंता दूर करे, मेरी विपदा दूर करे,
रख लेवे बात है!
नरसी रो तो काम, नरसी रो तो काम,
बस एक हाजरी लगानी है!
नरसी रो तो एक काम, नरसी रो तो एक काम,
बस एक हाजरी लगानी है!
ये तो सारी दुनिया जाने रे,
सांवरियो है सेठ, सांवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठानी है!