44. भव सागर से तारो राघव
Bhav sagar se taaro raghav
अक्षर का आकार
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
याही जगत तुम ही सांचे
जग या मैंने बिसारो
बिसारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
हे करूणानिधि करुणा करिये
मेरी ओर निहारो
निहारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
भव सागर में नाव फंसी है
तुम ही खेवनहारो
हारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
अधम उदारण करुणासिंधु
जीवन डोर संभारो
संभारो
भव सागर से तारो राघव
भव सागर से तारो
जानकीशरण चरण शरण है
जीवन तुम पर वारो।
जीवन तु
भव सागर से तारो राघव,
भव सागर से तारो
रचनाकार -जानकीशरण महाराज श्री