भजन

11. ब्रज में हे रही जय जयकार नन्द घर प्रगटे नंदकिशोर

Braj mein hai rahi jai jaikaar nand ghr pragte nandkishor

अक्षर का आकार

ब्रज में हो रही जय जयकार
नंद घर प्रगटे नंदकिशोर
प्रगटे नंदकिशोर ये हैं छलिया माखन चोर

① नंद को लाल बडो है प्यारो
वृंदावन में सबसों न्यारो
गावे गीत बधाई ब्रज में
सब हैं भाव विभोर
ब्रज - - -

② नंद भवन बड़ो प्यारो लागे
बृजमंडल में न्यारो लागे
ऐसी धूम मचो भारी
छाया आनंद हिलोर - ब्रज - - -

③ यशोदा सुत पे बलि बलि जाऊँ
नंद भवन से बधाई लाऊँ
नंद नंदन के चरणों से मैं
बाँधूं मन की डोर - ब्रज - - -

④ रूप छबीलो चटक मटक सों
बजबासी हैं भाव मगन सों
लीला देखन देवन में भी
लगी हुई है होड़ - ब्रज - - -

⑤ त्रिपुरारी भी ध्यान करत हैं
नित्य हरी का नाम जपत हैं
जानकीशरण को शरण में राखो
खींचों अपनी ओर - ब्रज - - -

रचनाकार -जानकीशरण महाराज श्री