26. छंद कृष्ण जन्माष्टमी
Chnd krishna jnmashtmi
तिथि अष्टमी मास भाद्रपद चहुँ दिशि उठे हिलोर
प्रहार द्वितिय नक्षत्र रोहिणी प्रकट भयो चितचोर
बधाई हो बधाई हो
भए प्रगट गोपाला नन्द को लाला
जग के पालनहारे
ब्रज भूप पधारे नन्द के द्वारे
बाजत ताल नगाड़े
सब देव सिहाए
अति हर्षाए
खूब बधाई गाए
आनंद कंद सच्चिदानंद ये
धारा धाम पे आये
धारा धाम पे आये
धारा धाम पे आये
ब्राह्मदिक आये मंगल गाए
शंकर डमरू बजाए
नारद वीणा से राग सुनाए
गोविन्द गोविन्द गाए
यमुना जी आई अति हर्षाई
हर्ष आनंद मनाई
हे जन सुखदाई
कृष्ण कन्हाई
नन्द बाबा को बधाई
यशोदा जी को बधाई
नंदुत्सव में माधव आवे
ऐसो.भाव बनायो
जानकीशरण ने ह्रदय कुंज से
गिरधर को हे बुलायो
गिरधर को हे बुलायो
नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की!"
कोटि ब्रह्महांड के अधिपाती लाल कि
गौएँ चराने आये जय हो प्रतिपाल
नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की!"
हे री हे भैया हो, आज नंदराय के आनंद भयो,
हे री हे मैया हो, आज नंदराय के आनंद भयो।
भैया हो आज नंदराय के आनंद भयो,
मैया हो आज नंदराय के आनंद भयो।
बधाई हो बधाई हो
रचनाकार -जानकीशरण महाराज श्री