पद

28. रघुवर गिरधर प्यारो मोहे राग केदार

Raghuvar girdhar pyaaro mohe raag kedaar

अक्षर का आकार

रघुवर गीरधर प्यारो मोहे रघुवर गिरधर प्यारो

एक के हाँथ मैं धनुष विराजे
दूजे गिरिवर धारो
एक सिया जू को प्राण नाथ है
एक राधा घर वारो
रघुवर गीरधर प्यारो मोहे रघुवर गिरधर प्यारो

पीताम्बर सोहे एक के तन
एक काछनी धारो,
मोर मुकुट एक शीश विराजे,
दूजे मुनि मन हारो।
रघुवर गीरधर प्यारो मोहे रघुवर गिरधर प्यारो

एक ऋषिजन रक्षा कीन्हे
दूजो नाग नाथारो
एक कौशल्या के आँगन डोले,
एक जसोदा दुलारो,
रघुवर गीरधर प्यारो मोहे रघुवर गिरधर प्यारो

राघव मेरो जीवन धन है
माधव प्राण अधारो
जानकीशरण की आस यही बस
करहु कृपा भव तारो
रघुवर गीरधर प्यारो मोहे रघुवर गिरधर प्यारो

रचनाकार -जानकीशरण महाराज श्री

रचनाकार - जानकीशरण महाराज श्री