पद सीता-राम

16. जय युगल छवि सीतारमण

Jai Yugal Chhavi Sitaraman

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जय युगल छवि सीतारमण
जय युगल छवि सीतारमण
व्योमांग के प्रभु प्राण हे

१

जय धनुरधारी विपतहारी
हिय विराजो आन हे
जय शम्भू प्रिय राघव दुलारे
मेरे प्यारे सँवारे
जय युगल छवि सीतारमण…

२

जय कौशलेन्द्र अवधपती
करुणानिधि गुणखान हे
जय कृपामूर्ति हे प्रतिपालक
स्वामी मेरे राम हे
जय युगल छवि सीतारमण…

३

रघुकुल शिरोमणि जगत पालक,
राम तो सुखधाम हे
अगणित अमित छवि सिय पिया की,
मेटो हरी अज्ञान हे
जय युगल छवि सीतारमण…

४

चरणन कि रज को शीश धारूँ
तजूँ जगत अभिमान हे
राम सीता राम सीता
जपूँ मैं आठों याम रे॥
जय युगल छवि सीतारमण…

५

तुम्हारी शरण में जब से आये
मन पाए विश्राम हे
मन कि वीणा से राग रागिनी
करती है गुणगान हे
जय युगल छवि सीतारमण…

६

नयनों में छवि बस रही सुंदर
मुख में तेरा नाम रे
तुम कृपा के सिंधु हों राघव
भक्ति का दो दान रे
जय युगल छवि सीतारमण…

७

जानकीशरण सीतारमण
करुणाकरण वंदित चरण
हे कृपामूर्ति दयासागर
सुनलो करुण पुकार हे
हे युगल छवि सीतारमण…

८

पद रचित करता विघ्नहर्ता
सिया जु को जान हे
यह पद जो गावे राम पावे
जानकी को वरदान ये
हे युगल छवि सीतारमण…

जय जनक नंदिनी जगतवनदिनी
राम कि प्रिया प्राण हे
हे आदिशक्ति सृजनकारी
तुम्हरी कृपा जग जान हे

  • युगल छवि
  • जानकीशरण