पद

42. अरे मन संभल संभल पग धरिये

Are mn sambhl sambhl pag dhariye

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अरे मन संभल संभल पग धरिए।
इस जग में नहीं अपना कोई,
परछाई सो डरिए॥

दौलत शोहरत कुटुंब कबीला,
इन सो नेह कबहु ना करिए।
राम नाम सुख धाम जगत में,
सुमिर सुमिर भव तरिए॥
अरे मन संभल संभल पग धरिए...