भजन कृष्ण

5. बिनती सुनिए नाथ हमारी

Binti Suniye Naath Hamari

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बिनती सुनिए नाथ हमारी, बिनती सुनिए नाथ हमारी,
हृदयेश्वर हरी हृदय बिहारी, हृदयेश्वर हरी हृदय बिहारी,
मोर मुकुट पीतांबर धारी, बिनती सुनिए नाथ हमारी॥

अंतरा १

जनम जनम की लगी लगन है, साक्षी तारो भरा गगन है,
गिन गिन स्वाश आस कहती है, आएँगे श्री कृष्ण मुरारी,
॥ बिनती सुनिए नाथ हमारी…॥

अंतरा २

सतत प्रतीक्षा अपलक लोचन, हे भव बाधा बिपति बिमोचन,
स्वागत का अधिकार दीजिए, शरणागत है नयन पुजारी,
॥ बिनती सुनिए नाथ हमारी…॥

अंतरा ३

और कहूं क्या अंतर्यामी, तन मन धन प्राणो के स्वामी,
करुणाकर आकर के कहिए, स्वीकारी विनती स्वीकारी,
॥ बिनती सुनिए नाथ हमारी…॥

  • मुरारी
  • प्रतीक्षा
  • शरणागति