पद

40. प्यारी नित ऐसे ही तुम्हे निहारू

Pyaari nit aese hi tumhe nihaarun

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प्यारी नित ऐसे ही तुम्हें निहारूँ,
(प्यारे नित ऐसे ही तुम्हें निहारूँ)
तृण तोरूँ या चन्द बदन पै, राई नोन उतारूँ॥
प्यारी नित ऐसे ही तुम्हें निहारूँ...

अंतरा

निजकर करूँ श्रृंगार तिहारो, मुख पै भ्रमर बिडारूँ।
नारायण जब तुम कछु गावो, मैं ढिंग साज सँवारूँ॥
प्यारी नित ऐसे ही तुम्हें निहारूँ...