पद

29. राघव ही माधव बनी आये राग केदार

Raghav hi madhav bni aaye raag kedaar

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राघव ही माधव बनी आये

राघव ही माधव बनी आये
राघव ही माधव बनी आये

त्रेता जुग जा सारंग धारो
सोइ द्वापर गिरिराज उठाये
राघव ही माधव बनी आये

एक रूप ये रघुनंदन हैं
एक रूप नन्द नंदन कहाए
एक रूप सीता के स्वामी
दूजो राधावर कहलाये
राघव ही माधव बनी आये

मर्यादा को रूप राम है
द्वापर प्रेम रूप हो आये
हे रागिनी चरण पढ़े दोनों की
बाल रूप मोहे अति भाए
राघव ही माधव बनी आये

राम कृष्ण हरी नारायण मैं
भेद करत सों मूड कहाये
अंतर नाहीं दोउ रूपण मैं
मेरे दोनों ह्रदय समाय
राघव ही माधव बनी आये

रचनाकार -जानकीप्रिया

Composed by - जानकीप्रिया मैया